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| पूनम यादव |
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में दादूपुर गांव के किसान परिवार श्री कैलाश यादव व श्रीमती उर्मिला यादव की बेटी 23 वर्षीय पूनम यादव ने 69 किलोग्राम भार वर्ग में, 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 (गोल्ड कोस्ट, आस्ट्रेलिया) मे स्नेच और क्लीन एंड जर्क में 222 किलोग्राम वजन उठा कर गोल्ड मेडल हासिल किया है।
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इससे पहले 2014 ग्लासगो Commonwealth में कांस्य पदक, एशियाड 2014 में सिल्वर पदक हासिल किया। पूनम यादव के बेहतर उपलब्धियों को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से सम्मानित किया था।
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बता दे, बेहद गरीब परिवार में जन्मी पूनम यादव पांच बहनों व दो भाइयों में चौथे नंबर की है। ग़रीबी से लड़ते हुए, पिता कैलाश यादव ने पूनम के खेल के लिए वो अपनी चार भैसें बेच चुके हैं। भैंस चराते हुए दूध बेचकर कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने तक का सफर बेहद संघर्षित व चुनौतीपूर्ण रहा है। पूनम यादव का दृढ निश्चय से ही यह मुकाम हासिल की है।
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उनकी यह उपलब्धि गांव, किसान, गरीब, मजदूर परिवार से आने वाले युवाओं के लिए प्रेरणा दायक सिद्ध होगी।पूनम यादव की यह उपलब्धि गाँव से लेकर कस्बे और शहर तक के युवाओं के लिए प्रेरणा दायक है, कि जीवन की चुनौतियां सामाजिक,मानसिक और आर्थिक स्तर तक की जीवन के अंत तक बनी रहती है। लेकिन जीतता वही है जो अंत तक लङता है। जिसे आज पूनम ने सिद्ध कर दिखाया है।
भगवान थे बेटी के साथ : पूनम के पिता
पूनम यादव के पिता कैलाश यादव ने कहा सुबह टीवी नहीं देख पाए, मालूम था पर सफर में रहा तो नहीं देख पाया। भगवान थे बेटी के साथ। वो कन्या नहीं लड़का है। पूनम के स्वागत की तैयारी पर सवाल पूछने पर कहा कि भगवान करेंगे स्वागत। पिछली बार गांववालों के खूब स्वागत किया। सबसे बड़ी समस्या है, गाँव में सड़क नहीं है।


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