"बोलने वाला नही" बल्कि "काम करके दिखाने वाले प्रधानमंत्री" की सख़्त जरूरत : Mayawati







बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो श्री बहन मायावती ने बीजेपी और प्रधान मंत्री पर निशाना साधते हुए कहाँ कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह का देश के ऊपर इस कड़वे सच को स्वीकार करने हेतु उपकार कि बीजेपी ने देश को बोलने वाला पीएम दिया है।



उन्होंने कहाकि परन्तु देश को "बोलने वाला नही" बल्कि "काम करके दिखाने वाले प्रधानमंत्री" की सख़्त जरूरत है ताकि जानलेवा महंगाई, बढ़ती हुई बेरोजगारी, अपार गरीबी, बदतर शिक्षा व स्वास्थ्य के साथ-साथ कानून-व्यवस्था के मामले में अराजकता के अभिशाप से लोगों को मुक्ति मिल सके।


इसी ही पैटर्न पर उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार भी चल रही है, जिसकी कथनी और करनी में बड़ी खाई जैसा अंतर है तथा खासकर कानून-व्यवस्था लगातार ही बिगड़ती चली जा रही है। सीएम स्तर की समीक्षा भी लोगों की भलाई के लिये कुछ काम नहीं आ रही है। 



बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने देश के सामने इस कड़वे सच को स्वीकार कर उपकार किया है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी "बोलने वाले प्रधानमंत्री हैं जबकि विपक्षी पार्टियाँ व आमजनता की भी यही शिकायत है कि देश को "बोलने वाला नहीं" बल्कि "काम करके दिखाने वाले प्रधानमंत्री" की सख़्त जरूरत है ताकि जानलेवा महंगाई, बढ़ती हुई बेरोजगारी, अपार ग़रीबी, बदतर शिक्षा व स्वास्थ्य के साथ-साथ कानून-व्यवस्था के मामलें में अराजकता के अभिशाप से लोगों को मुक्ति मिल सके।



स्वतन्त्र भारत के इतिहास में यह पहला मौका है कि जब देश का प्रधानमंत्री सिर्फ एकतरफा तौर पर अपनी बात कहने में विश्वास रखता है और उसके लिये सरकारी माध्यमों व संसाधनों का केवल अपने लिये इस्तेमाल करना पसंद करता है तथा सरकारी शक्ति का दुरूपयोग करके विपक्ष की बातों के साथ-साथ स्वतन्त्र व निष्पक्षता को हर प्रकार से दबाने का प्रयास करता है फिर भी बीजेपी एंड कम्पनी का यह कहना है कि उसने देश को बोलने वाला प्रधानमंत्री दिया है। लेकिन मूल प्रश्न यह है कि ऐसा केवल बोलने वाला प्रधानमंत्री देश के गरीबों, मजदूरों, किसानों, बेरोजगार युवकों, छोटे व मझोले व्यापारियों के साथ-साथ अन्य मेहनतकश लोगों के किस काम का जो उन वर्गों की समस्या का समाधान करने कि बजाय उनके जीवन को और ज्यादा नरक कर रहा है।



कुछ इसी ही पैटर्न पर उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार भी चल रही है, जिसकी कथनी और करनी में बड़ी खाई जैसा अंतर है। खासकर अपराध-नियंत्रण व कानून-व्यवस्था के मामलें में तो स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है क्योंकि खुद सत्ताधारी पार्टी के लोग हर प्रकार के अपराध में लिप्त पाये जा रहे हैं। ऐसे में मा. मुख्यमंत्री स्तर पर समीक्षा भी बेमायने होकर रह गई लगती है क्योंकि जनता को इससे कोई भी राहत नही मिल पा रही है।

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