पीएम के संसदीय क्षेत्र BHU में सुरक्षित नहीं बेटियाँ , विश्वविधालय के गेट पर लड़कियों का जोरदार प्रदर्सन

 

Protest IN BHU
BHU गेट पर प्रदर्शन करती छात्राये और देवी दर्शन करते पीएम मोदी



वाराणसी: मोदी सरकार एक तरफ बेटी बचाओं और बेटी पढ़ाओं की बात करती है वहीं दूसरी तरफ पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पढ़ने वाली छात्राएं ही खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी के दो दिन के दौरे पर है। और उनके पहुंचने से पहले बीएचयू की छात्राओं ने बीएचयू गेट के सामने छेड़खानी के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रही थी।  यहां तक कि विरोध में एक छात्रा ने अपना सिर तक मुंडवा लिया।




गुरुवार शाम लगभग ६ बजे एक लड़की के साथ हुई कथित छेड़खानी के विरोध में ये छात्राएं बीते दिन शुक्रवार सुबह 7 बजे से मुख्य द्वार पर धरने पर बैठी हुई है।  इनका आरोप है कि गुरुवार को हुई छेड़खानी की घटना की शिकायत जब वो बीएचयू प्रशासन से करने पहुंची तो उन्हें कहा गया कि शाम को 6 बजे घूम क्यों रही थी। इस घटना से नाराज बीएचयू फाइन आर्ट विभाग की आकांक्षा गुप्ता नाम की छात्रा ने अपना सिर मुंडवा लिया और वो सुबह से लगातार मुख्य द्वार पर प्रदर्शन करती रही।  प्रशासन ने इन लड़कियों को हटाने की बहुत कोशिश की लेकिन लड़कियों की मांग है कि जबतक कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी खुद आकर उन्हें आश्वासन नहीं देते तब तक वो धरना समाप्त नहीं करेंगी। 








इसी बिच पीएम मोदी को बीएचयू गेट से होकर ही दुर्गा मंदिर और मानस मंदिर जाना था लेकिन प्रशासन ने आनन फानन में पीएम का रूट बदल दिया गया। लड़कियां फिलहाल मुख्य द्वार से हटने को तैयार नहीं हैं और वीसी को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़ी हुई हैं। 









प्रधान मंत्री के रूट बदले जाने पर 'आम आदमी पार्टी ' नेता संजीव सिंह ने पीएम पर निशाना साधते हुए कहा कि '' यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता " इसका अर्थ आदरणीय राष्ट्र ऋषि/फकीरचंद जी ने समझा होता तो अपने घर की इन देवियों दुर्गा ,लक्ष्मी,सरस्वती का सम्मान या इनका ही एक बार दर्शन किया होता या इन पर क्या बीती जान लिया होता। तो ये दिखावटी ''दुर्गा मंदिर " की पूजा से ज्यादा पुण्य मिलता वैसे भी नवरात्रि का नवमी पारण कन्या पूजन से ही पूर्ण होता है काश आज इन वीरंगनाओ का सम्मान किया होता तो इनके प्रताप से बगैर बी.एच.यू. आये गली गली बनारस से न भागना होता प्रधान सेवक जी। 



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