कुछ महत्वपूर्ण कानून की धराये और अधिकार, जानकारी नहीं होने से उठाना पङता है नुकसान



IPC ke dharawo ka gyan
सुप्रीम कोर्ट 



देश की क़ानूनी धाराओं की थोड़ी बहुत जानकारी रखनी चाहिए क्योकि सामान्य धाराओं का जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। जिसकी जानकारी नहीं होने पर नुकसान उठाना पड़ता है। आइये जानते है  IPC में धाराओ का मतलब क्या है। 
  1. धारा 307   -   हत्या की कोशिश 
  2. धारा 302   -   हत्या का दंड 
  3. धारा 376   -   बलात्कार 
  4. धारा 395   -   डकैती 
  5. धारा 377   -  अप्राकृतिक कृत्य
  6.  धारा 396  -  डकैती के दौरान हत्या
  7.  धारा 120  -  षडयंत्र रचना 
  8. धारा 365   -  अपहरण
  9.  धारा 201  -  सबूत मिटाना
  10.  धारा 34    -   सामान आशय 
  11. धारा 412   -  छीनाझपटी 
  12. धारा 378   -   चोरी 
  13. धारा 141   -  विधिविरुद्धजमाव 
  14. धारा 191   -  मिथ्यासाक्ष्य देना 
  15. धारा 300   -  हत्या करना
  16.  धारा 309  -  आत्महत्या की कोशिश 
  17. धारा 310   -   ठगी करना 
  18. धारा 312   -  गर्भपात करना
  19.  धारा 351  -  हमला करना 
  20. धारा 354   -  स्त्री लज्जाभंग 
  21. धारा 362   -  अपहरण 
  22. धारा 415   -  छल करना 
  23. धारा 445   -  गृहभेदंन 
  24. धारा 494   -  पति/पत्नी के जीवनकाल में पुनःविवाह
  25.  धारा 499  -  मानहानि 
  26. धारा 511   -  आजीवन कारावास से दंडनीय अपराधों को करने के प्रयत्न के लिए दंड।


 हमारेे देश में संवैधनिक कानूनन कुछ ऐसी हकीक़तें है, जिसकी जानकारी हमारे पास नहीं होने के कारण हम अपने अधिकार से मेहरूम रह जाते है। आइये जानते है कुछ महत्वपूर्ण अधिकारों के बारे में जो जीवन में कभी भी उपयोगी हो सकती है। 


1. शाम के वक्त महिलाओं की गिरफ्तारी नहीं हो सकती

संविधान के कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर, सेक्शन 46 के तहत शाम 6 बजे के बाद और सुबह 6 के पहले भारतीय पुलिस किसी भी महिला को गिरफ्तार नहीं कर सकती, फिर चाहे गुनाह कितना भी संगीन क्यों ना हो। अगर पुलिस ऐसा करते हुए पाई जाती है, तो गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत (मामला) दर्ज की जा सकती है। इससे संलिप्त पुलिस अधिकारी की नौकरी खतरे में आ सकती है।  

2. सिलेंडर फटने से जान-माल के नुकसान पर 40 लाख रूपये तक का बीमा ( Insurance up to Rs 40 lakh for the loss of life and property from the cylinder bursts )


 पब्लिक लायबिलिटी पॉलिसी के तहत अगर किसी कारण आपके घर में सिलेंडर फट जाने और आपको जान-माल का नुकसान झेलना पड़ता है तो आप तुरंत गैस कंपनी के द्वारा बीमा कवर क्लेम कर सकते है। आपको बता दे कि गैस कंपनी से 40 लाख रूपये तक का बीमा क्लेम कराया जा सकता है।  अगर कंपनी आपका क्लेम देने से मना करती है या टालती है तो इसकी शिकायत की जा सकती है। दोषी पाये जाने पर गैस कंपनी का लायसेंस रद्द हो सकता है। 

3. होटल को पानी पीने और वाश रूम के लिए फ्री इस्तमाल कर सकते है ( Hotel  drink water and wash room use for free of charge)

 इंडियन सीरीज एक्ट, 1887 के अनुसार आप देश के किसी भी होटल में जाकर पानी मांग कर पी सकते और  वाश रूम भी इस्तमाल कर सकते है। होटल छोटा हो या 5 स्टार, वो क़ानूनी तौर पर आपको रोक नही सकते।  अगर होटल का मालिक या कोई कर्मचारी आपको पानी पिलाने से या वाश रूम इस्तमाल करने से रोकता है तो आप उन पर कारवाई कर सकते है। आपकी शिकायत से उस होटल का लायसेंस रद्द हो सकता है। 


4. गर्भवती महिलाओं को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता (Pregnant women can not be removed from the job )


मातृत्व लाभ अधिनियम (Maternity benefit act) 1961 के मुताबिक़ गर्भवती महिलाओं को अचानक नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। मालिक को पहले तीन महीने की नोटिस देनी होगी और प्रेगनेंसी के दौरान लगने वाले खर्चे का कुछ हिस्सा देना होगा। अगर वो ऐसा नहीं करता है तो उसके खिलाफ सरकारी रोज़गार संघटना में शिकायत कराई जा सकती है। इस शिकायत से कंपनी बंद हो सकती है या कंपनी को जुर्माना भरना पड़ सकता है 


5. पुलिस अफसर आपकी शिकायत लिखने से मना नहीं कर सकता ( Police officer can not refuse to write your complaint )


आईपीसी के सेक्शन 166ए के अनुसार कोई भी पुलिस अधिकारी आपकी कोई भी शिकायत दर्ज करने से इंकार नही कर सकता।  अगर वो ऐसा करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ वरिष्ठ पुलिस दफ्तर में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। अगर वो पुलिस अफसर दोषी पाया जाता, तो उसे कम से कम 6 महीने से लेकर 1 साल तक की जेल हो सकती या फिर उसे अपनी नौकरी गवानी पड़ सकती है। 


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